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लेखक/रचयिता: सूरदास
सूरदास जी रचित भ्रमरगीत से उद्धृत पदों में गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेमानुराग और उद्धव के निर्गुण ज्ञान-योग का उपहास प्रस्तुत किया गया है। गोपियाँ उद्धव को 'बड़भागी' (भाग्यशाली) कहकर व्यंग्य करती हैं कि वे कृष्ण के समीप रहकर भी उनके प्रेम से अछूते रहे।
सगुण प्रेम-भक्ति की निर्गुण ज्ञान-योग पर विजय।
श्रीकृष्ण की अनन्य निष्ठावान प्रेमिकाएँ।
श्रीकृष्ण का ज्ञानी दूत जो निर्गुण ब्रह्म का संदेश लाता है।
उत्तर: वास्तव में गोपियाँ उन्हें अभागा कह रही हैं कि प्रेम के सागर कृष्ण के साथ रहकर भी वे प्रेम के आनंद से वंचित रहे।
उत्तर: कड़वी ककड़ी (करुई ककरी) और व्याधि (रोग) से की है जो कभी देखा-सुना नहीं गया।