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लेखक/रचयिता: शिवपूजन सहाय
यह संस्मरण देहाती दुनिया का आत्मीय चित्र पेश करता है। बालक तारकेश्वरनाथ (भोलानाथ) का पिता के साथ गहरा लगाव था। वे पिता के साथ ही सोते, जागते और पूजा में बैठते थे। परंतु जब चूहे के बिल में पानी डालने पर साँप निकल आया, तो भयभीत भोलानाथ पिता की गोद छोड़कर सीधे माँ की गोद में छिप गया।
मातृ-स्नेह की अगाधता और बाल-सुलभ क्रीड़ाएँ।
चंचल देहाती बालक।
वात्सल्यमयी पिता जो बच्चे के साथ खेलते थे।
उत्तर: क्योंकि माँ का आँचल बच्चे को परम शांति, सुरक्षा और ममता की छाँव प्रदान करता है।